सतभक्ति अपनाए महामारी भगाए
समय का बदलाव
समय 4 भागो में बंटा हुआ है पूर्व काल , वर्तमान काल व भविष्य काल। मगर नियति के विधान को कोई नही जानता सिवाय परमेश्वर के।
प्राचीन काल के लोगो को इतिहास के माध्यम से जाना जरूर हैं मगर महसूस नही कर सकते कि बिना किसी साधन के लोगो मे क्या बीती थी। कानो से सुना जरूर है कि किसी प्रकार का रागद्वेष अधिक नही था तथा प्रेम से रहा करते थे।
प्राचीन समय के बारे में सुनकर जब वर्तमान की बात करते हैं तो दिन ओर रात का अंतर हो गया लेकिन जैसे ही वर्तमान परिस्तिथियों को मध्य नजर रखते हुए भविष्य की तरफ विचार करते हैं तो हर कोई कांप जाए। वर्तमान में इंसान के ये हालात हैं तो भविष्य में क्या होंगे यह हम कल्पना ही नही कर सकते।
कोरोना काल
जिस प्रकार 6 महीने पहले कोरोना महामारी की कल्पना नही की जा सकती थी वैसे ही अब आने वाले कल की कल्पना भी नही की जा सकती की अब क्या होने वाला है ।
महामारी के कारण
एक बात जरूर कहना चाहते हैं कि जब भी धरती पर कोई अप्रिय घटना हुई है , उनसे निजात पाने के लिए किसी न किसी महापुरुष ने उससे बचाब का तरीका जरूर बताया है मगर अभिमान वस किसी ने उनकी बातों पर विश्वास नही किये ।
धरती पर अप्रिय घटना होना यह वर्तमान के मनुष्य के स्वभाव पर निर्भर रहता हैं क्योंकि मनुष्य अपने किये कर्मो के अनुसार ही यहां पर फल भोगते है इसके लिए किसी अन्य या भगवान को जिमेदार नही मान सकते ।
हमारे शास्त्रों में लिखा हैं कि जब भी धरती पर पाप बड़ता हैं ओर धार्मिकता की कमी होती हैं तो महामारी जैसे आपदाएं आती है ।
अब यह स्तिथि क्यो बिगड़ी हैं इसको एक सठीक उदाहरण के द्वारा जान सकते हैं । जैसे किसी घोड़े को बिना लगाम के रथ से जोड़ दिया जाए तो वह घोड़ा किसी भी दिशा में चल पड़ता हैं क्योंकि वह अनियंत्रित है ओर उसे दिशा का ज्ञान देने के लिए कोई साधन प्रयोग नही किया है । इसलिये वह मनमर्जी से किसी भी दिशा में जा सकता है जिसका परिणाम बताने की जरूरत नही है।
ठीक उसी तरह आज का इंसान बिना लगाम का घोड़ा समझो । वर्तमान में , अभिमान , सुंदर सरीर , कार कोठी की चाह में इंसान अपना पथ भूल चुका है तथा किसी परामर्श की आवश्यकता नही समझता।
आज के मनुष्य को परिस्तिथियों के अनुसार चाहिए कि अपने अंदर अच्छे विचारों को बढ़ावा दे इसके लिए हमे प्राचीन परंपरा जैसे सत्य साधना , सास्त्र अनुकूल ही कर्म करना चाहिए।
जिस तरह घोड़े की लगाम से घोड़ा अपनी निश्चित दिशा में चलता है उसी तरह इंसान को भी चाहिए कि वह शास्त्रों में लिखे मार्ग को अपनाए । शास्त्र ही हमारी लगाम है ।
अगर हम शास्त्रो में लिखे मार्ग पर चलते हैं तो किसी भी परिस्तिथियों में हम विजय प्राप्त कर सकते है।
वेद, कुरान, व बाइबल में स्प्ष्ट लिखा है कि परमेश्वर किसी भी असाध्य रोग को ठीक कर सकता है ।
परन्तु आज भयानक दृश्य देश विदेशों से देखने को मिल रहा है इसका कारण है हम बिना लगाम के काम करते हैं जिसका परिणाम यही है। सुना था कि मीरा बाई जहर भी पी गई फिर भी नही मरी , भक्त प्रह्लाद, भी किसी भी तरीके से नही मरा । क्या भगवान बदल गया या भगवान का विधान बदल गया?
नही ! भगवान भी वही है और विधान भी वही है मगर हमारा सास्त्र अनुकूल कर्म करने का तरीका बदल गया जिसका परिणाम , वर्तमान स्तिथि हैं।
सास्त्र अनुकूल कर्म कौनसे हैं और कोनसी हैं वह सत्य साधना जिससे वर्तमान महामारी से बचा जा सकता हैं ?
संसार मे बहुत से तरह तरह के सन्त हैं जो कई तरह के दावे करते हैं । जिनमे से तो कई सीधे भगवान से मिलाने की बात करते हैं। मगर उनकी सब बातें उल्टी सिद्ध हो रही हैं।
सन्त रामपाल जी महाराज इस धरती पर एक मात्र सन्त हैं जो शास्त्रो के अनुकूल सतभक्ति बताते हैं जिससे किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान स्वतः ही हो जाता है । शास्त्रो में लिखी हर बात को प्रत्यक्ष प्रमाण देकर सिद्ध करते हैं तथा बताते हैं कि मानव के तीन ताप के दुखों को केवल कबीर परमेश्वर जी ही मिटाते सकते है अगर उनकी भक्ति सही विधि के की जाए तो । वेदों से प्रमाण के तोर पर बताये भी हैं कि परमेष्वर, सास्त्र अनुकूल साधना करने वाले के सभी रास्ते सुगम करता हैं ।
अगर वर्तमान में सभी देश के नागरिक सन्त रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेकर भक्ति करने लग जाये तो किसी भी महामारी से बचा जा सकता हैं। क्योकि कोई भी आपदा पाप कर्मों के बढ़ने से आती हैं उसका समाधान भी सच्चे सन्त ही कर सकते है ।
सन्त रामपाल जी महाराज जी ने वर्तमान में कोरोना महामारी की बारे में पहले ही बता चुके है कि आने वाले समय मे बहुत तरह की आपदाएं आने वाली हैं । जिनसे बचने के लिए सतभक्ति करके अपना बचाव करें ।
सन्त रामपाल जी महाराज संसार को इस आपदा से मुक्त कर सकते हैं अगर समय रहते दुनिया के रास्ट्राध्यक्ष जाग जाए तो , नही तो आने वाले समय मे पश्चयताप के अलावा कुछ नही बचेगा।
संसार के समस्त भविस्यवक्ताओ ने सन्त रामपाल जी महाराज जी की तरफ इशारा कर दिया है सिर्प नाम बताना शेष रहा है बाकी अपना निष्कर्ष बता दिया है अब पहचानना आपका काम है । आप स्वम विवेक को काम ले और जल्द ही पहचानने की कोसिस करे।
